14 जनवरी 2021 - 13:17
यह है ईरान को युद्ध में घसीटने की इस्राईल व अमरीका की ताज़ा कोशिश... ईरान का रणनीतिक संयम कब तक रहेगा जारी? क्या बरसाएगा इस्राईल पर मिसाइल़? रायुलयौम का संपादकीय

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुलयौम ने अपने सपांदकीय में ईरान को युद्ध में घसीटने की एक ताज़ा कोशिश का जायज़ा लिया है।

   यह तो निश्चित है कि इस्राईल ने सीरिया के दैरुज़्ज़ूर के उत्तर में और इराक़ की सीमा के निकट स्थित अलबू कमाल में जो युद्धक विमानों से हमला किया है और जिस में 60 लोगों के शहीद होने की खबर है, ईरान को भड़काने और उसे जवाबी कार्यवाही के लिए उकसाने की ताज़ा कोशिश है ताकि बचे हुए दिनों में ट्रम्प सरकार की ईरान पर हमले और जो बाइडन की राह में बाधा की योजना को आगे बढ़ाया जा सके।

    सीरियाई सेना के औपचारिक बयान को इस देश की सरकारी न्यूज़ एजेन्सी साना ने प्रकाशित किया और असाधारण रूप से उसमें यह कहा गया है कि इस्राईल के इस हमले में इराक़ी सीमा के निकट ईरान समर्थित संगठनों को निशाना बनाया गया है और इसका उद्देश्य, इन संगठनों  और ईरान को भी इस्राईल पर मिसाइल बरसाने के लिए उकसाना है जो निश्चित रूप से इलाक़े में युद्ध की आग भड़का सकता है जिसका सरगना इस्राईल होगा।

    इस विचार को एपी न्यूज़ एजेन्सी की उस रिपोर्ट से भी बल मिलता है जिसमें  अमरीका के एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अमरीकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने गत सोमवार को वाशिंग्टन के " मीलानो" कॉफी हाउस में इस्राईली खुफिया एजेन्सी के प्रमुख यूसी कोहन से भेंट में इस्राईल के इस हमले पर चर्चा की थी।

    ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों और मूल भूत ढांचे पर हमले इस्राईली व अमरीकी योजना को नाकाम बनाने की एक प्रभावशाली रणनीति, धैर्य व संयम है विशेष कर इस लिए भी कि ट्रम्प सरकार के मात्र छे दिन ही बचे हैं और इसके साथ ही अमरीका, आतंरिक समस्याओं में फंसा हुआ है जबकि संकट गहराने और गृहयुद्ध के आरंभ के बादल भी अमरीका पर मंडरा रहे हैं लेकिन बहुत से विशेषज्ञ, रूस की एस-300 एन्टी मिसाइल व्यवस्था के बारे में पूछ रहे हैं और यह सवाल कर रहे हैं कि उसकी मदद से इस्राईल के हमले को नाकाम क्यों नहीं बनाया गया? विशेषर इस लिए भी कि ईरान और सीरिया दोनों के पास एस-300 एन्टी मिसाइल मौजूद है जबकि इस्राईल के कई मिसाइलों ने सीरिया के एयरपोर्ट और सैन्य छावनी को भी निशाना बनाया।

    ईरानी अधिकारियों ने बार बार यह धमकी दी है कि अगर सीरिया और इराक़ में उसके मित्रों को इस्राईल या अमरीका ने निशाना बनाया तो उसका जवाब दिया जाएगा लेकिन अब यह लगता है कि जवाब न देने की वजह से इस प्रकार के हमलों में वृद्धि हो गयी है।

    तो क्या ट्रम्प के जाने के बाद इस प्रकार के हमलों पर ईरान के धैर्य का बांध टूट जाएगा या नये कारणों की वजह उसका रणनीतिक संयम जारी रहेगा? यह सवाल बहुत से विशेषज्ञ कर रहे हैं और उसके जवाब का इंतेज़ार भी कर रहे हैं और उम्मीद है कि इंतेज़ार लंबा नहीं होगा।